त्योहारी सीजन में महंगाई पर काबू पाने और जमाखोरी-कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं की स्टॉक लिमिट घटा दी है और इसे 31 मार्च 2026 तक लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि देश में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, इसलिए किसी तरह की चिंता की ज़रूरत नहीं है।
नए आदेश के मुताबिक अब व्यापारी (होलसेलर) अधिकतम 2000 मीट्रिक टन गेहूं ही स्टॉक रख पाएंगे, जबकि पहले यह सीमा 3000 मीट्रिक टन थी। रिटेलर्स के लिए स्टॉक सीमा प्रति आउटलेट 10 मीट्रिक टन से घटाकर 8 मीट्रिक टन कर दी गई है। प्रोसेसर अब अपनी मासिक प्रोसेसिंग क्षमता के 70% के बजाय सिर्फ 60% तक का गेहूं स्टॉक रख पाएंगे।
सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी भंडारण संस्थाओं को हर शुक्रवार गेहूं स्टॉक पोर्टल पर अपनी स्थिति अपडेट करनी होगी। यदि कोई संस्था स्टॉक सीमा से अधिक भंडारण करती है या पोर्टल पर जानकारी दर्ज नहीं करती है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई होगी। जिन संस्थाओं के पास अभी तय सीमा से अधिक स्टॉक है, उन्हें 15 दिनों के भीतर इसे कम करना होगा।
खाद्य मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2024-25 में कुल 1175.07 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ है और एफसीआई व राज्य एजेंसियों ने आरएमएस 2025-26 के लिए 300.35 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद भी कर ली है। यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य ज़रूरतों के लिए पर्याप्त है।
सरकार का मानना है कि स्टॉक लिमिट घटाने से जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगेगी, जिससे बाजार में गेहूं की सप्लाई दुरुस्त रहेगी और आम जनता को त्योहारी सीजन में महंगाई से राहत मिलेगी।