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ई-ऑक्शन दोबारा शुरू: गेहूं के भाव फिसले, फ्लोर मिलर्स पर दबाव बढ़ा

सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की ई-ऑक्शन बिक्री को दोबारा शुरू करने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इससे आटा मिलर्स और स्टॉकिस्ट्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से बाजार में आ रहा अतिरिक्त गेहूं भाव को और कमजोर कर सकता है, जिससे आगामी मार्केटिंग सीजन 2026-27 (1 अप्रैल से) में निजी क्षेत्र की खरीद हतोत्साहित होने की आ........

Government 09 Jan  Financial Express
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सरकार द्वारा ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत गेहूं की ई-ऑक्शन बिक्री को दोबारा शुरू करने से बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इससे आटा मिलर्स और स्टॉकिस्ट्स को नुकसान उठाना पड़ रहा है। व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के भंडार से बाजार में आ रहा अतिरिक्त गेहूं भाव को और कमजोर कर सकता है, जिससे आगामी मार्केटिंग सीजन 2026-27 (1 अप्रैल से) में निजी क्षेत्र की खरीद हतोत्साहित होने की आशंका है।

सूत्रों का कहना है कि निजी खरीदार सीजन की शुरुआत में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,425 प्रति क्विंटल पर गेहूं खरीदते हैं, लेकिन मौजूदा वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में लगभग ₹650 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त कैरींग कॉस्ट जुड़ जाता है। ऐसे में ई-ऑक्शन से बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर स्टॉकिस्ट्स की मार्जिन और सिकुड़ रही है।

फ्लोर मिलर्स के अनुसार, गेहूं के बाजार भाव हाल में करीब ₹100 प्रति क्विंटल गिरकर ₹2,750–₹2,800 प्रति क्विंटल के दायरे में आ गए हैं। इससे स्टॉक रखने वालों पर दबाव बढ़ा है। OMSS के तहत 2025-26 के लिए बल्क खरीदारों (जैसे मिलर्स) के लिए गेहूं का मूल्य ₹2,550 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जिसमें पंजाब से फ्रेट शामिल नहीं है।

इस सीजन में कीमतें सुस्त रहने की एक बड़ी वजह रिकॉर्ड उत्पादन भी है। अनुमान के मुताबिक, देश में गेहूं उत्पादन 117 मिलियन टन से अधिक रहा, जबकि मांग करीब 108 मिलियन टन आंकी जा रही है। खुले बाजार में पर्याप्त उपलब्धता के कारण भी कीमतों में तेजी नहीं बन पाई।

उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने कहा कि सरकारी स्टॉक की बिक्री नीति में अनिश्चितता से बाजार अस्थिर होता है। OMSS का उद्देश्य महंगाई को काबू में रखने के लिए रियायती दरों पर अनाज उपलब्ध कराना था, लेकिन बार-बार नीति में बदलाव से व्यापार प्रभावित हो रहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है।

सूत्रों के अनुसार, नवंबर और दिसंबर की शुरुआत में FCI ने केवल 0.15 मिलियन टन गेहूं ही बाजार में उतारा, जबकि FY26 के लिए 3 मिलियन टन का लक्ष्य था। कमजोर प्रतिक्रिया के चलते OMSS बिक्री पहले रोकी गई थी। FY25 में FCI ने 3 मिलियन टन गेहूं बेचा था, जबकि FY26 में 2 मिलियन टन से अधिक बिक्री की संभावना जताई जा रही है।

महंगाई के मोर्चे पर भी राहत दिखी है। नवंबर 2025 में गेहूं महंगाई घटकर 0.33% रही, जो अक्टूबर में 2.04% थी।

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