कनाडा के पल्स बाज़ार को लेकर कुछ राहत भरे संकेत मिल रहे हैं। लेफ्टफील्ड कमोडिटी रिसर्च के चक पेनर के अनुसार मटर और मसूर बाज़ार इस समय अपने निचले चक्र में है और आगे सुधार की संभावना है। उन्होंने बताया कि पिछले साल चीन और भारत के साथ व्यापारिक दिक्कतों के बावजूद अब हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं।
पेनर ने कहा कि कनाडा में इस बार मटर की रिकॉर्ड पैदावार बेहतर मौसम और हल्के तापमान की वजह से हुई, न कि ज्यादा रकबे या बारिश से। हालांकि रूस जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा है, लेकिन 1 मार्च से चीन द्वारा कनाडाई मटर पर 100% टैरिफ हटाना एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। चीन का स्टॉक 20 साल के निचले स्तर पर है, जिससे आयात बढ़ने की उम्मीद है।
उन्होंने अनुमान लगाया कि 2025-26 में चीन और भारत दोनों करीब 8-8 लाख टन कनाडाई मटर आयात कर सकते हैं। वहीं, 2026-27 में मटर का रकबा और पैदावार घटने से कुल उत्पादन कम रहेगा, जिससे स्टॉक घटने में मदद मिल सकती है।
मसूर की बात करें तो कनाडा के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में भी अच्छी पैदावार हुई है, लेकिन तुर्की, अमेरिका और कजाखस्तान जैसे देशों में रकबा घटने की संभावना है। कनाडा की मसूर कीमतें ऑस्ट्रेलिया से कम होने के कारण निर्यात को फायदा मिल सकता है। भारत में आयात शुल्क बढ़ने का खतरा जरूर है, लेकिन पेनर का मानना है कि इससे कनाडा के मसूर निर्यात पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
कुल मिलाकर, 2026-27 में बेहतर निर्यात, कम रकबा और औसत पैदावार से मटर और मसूर दोनों में बाज़ार संतुलन और कीमतों में सुधार की उम्मीद जताई गई है।