भारत सरकार ने किसानों और अनाज व्यापार से जुड़े हितधारकों को राहत देते हुए गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात की अनुमति दे दी है। हाल ही में जारी अधिसूचना के अनुसार, सरकार ने करीब 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं और उससे जुड़े उत्पादों जैसे आटा, मैदा और सूजी के निर्यात को सशर्त मंजूरी प्रदान की है। यह फैसला घरेलू मांग को संतुलित रखते हुए निर्यात को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
अधिसूचना के मुताबिक, निर्यात प्रक्रिया 21 जनवरी 2026 से शुरू होकर 31 मार्च 2026 तक चलेगी, जबकि शिपमेंट की अंतिम तिथि 10 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस योजना के तहत केवल वही मिलर्स और व्यापारी आवेदन कर सकेंगे जिनके पास वैध आईईसी (IEC) और एफएसएसएआई (FSSAI) पंजीकरण मौजूद है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए सरकारी पोर्टल के माध्यम से निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्यात की अनुमति मिलने के बाद यह 6 महीने तक वैध रहेगी और किसी भी परिस्थिति में 2,500 मीट्रिक टन से कम मात्रा के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। निर्यात की अंतिम मात्रा का निर्धारण एक विशेष निर्यात सुविधा समिति (EFC) द्वारा किया जाएगा, जो आवेदक की उत्पादन क्षमता, पिछले निर्यात रिकॉर्ड और घरेलू उपलब्धता जैसे पहलुओं की समीक्षा करेगी।
हालांकि, सरकार ने यह भी साफ किया है कि ईओयू और एसईजेड यूनिट्स के लिए पुराने नियम यथावत रहेंगे, यानी वे विदेशी बाजार की मांग के अनुसार पहले की तरह निर्यात कर सकेंगी। इसके अलावा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए आवंटित गेहूं के उपयोग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से फ्लोर मिल इंडस्ट्री, प्रोसेसर और निर्यातकों को बड़ा सहारा मिलेगा, वहीं घरेलू गेहूं बाजार में सप्लाई और कीमतों पर सरकार की कड़ी निगरानी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में इस निर्णय का असर आटा-मैदा उद्योग और गेहूं आधारित उत्पादों के व्यापार पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।