घरेलू बाजार में उड़द के स्टॉक की भारी कमी और आयात लागत में तेज़ बढ़ोतरी के चलते कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बाजार में उड़द के भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल के स्तर की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
आयात मोर्चे पर दबाव स्पष्ट है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और बर्मा (रंगून) में कीमतों में $70–72 प्रति टन की तेजी ने आयात को महंगा बना दिया है। रंगून बाजार में उड़द FAQ के भाव लगभग $860 प्रति टन और SQ के भाव $940 प्रति टन तक पहुंच चुके हैं, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
घरेलू उत्पादन की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में बिजाई का रकबा अपेक्षाकृत अधिक रहा, लेकिन बेमौसमी बारिश के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ। इसके चलते उत्पादन में 30–32 प्रतिशत तक की गिरावट आंकी जा रही है। पहले जहां देश का कुल उत्पादन 49–50 लाख टन के आसपास अनुमानित था, वहीं अब यह घटकर 36–37 लाख टन पर सिमटने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तर भारत की प्रमुख मंडियों में देसी उड़द की उपलब्धता लगभग समाप्त हो चुकी है। सहारनपुर, गंगोह और चंदौसी जैसी मंडियों में नया माल न के बराबर रह गया है, जिससे बाजार में सप्लाई का दबाव और गहरा गया है। व्यापारियों के अनुसार, मंडी भावों की रोज़ाना स्थिति से भी इस कमी की पुष्टि हो रही है।
स्टॉक के मोर्चे पर भी हालात तंग हैं। चेन्नई समेत प्रमुख बंदरगाहों पर पिछले साल की तुलना में उड़द का भंडार काफी कम बताया जा रहा है। सीमित स्टॉक के कारण दाल मिलें ऊंचे भावों पर प्रतिस्पर्धात्मक खरीद करने को मजबूर हैं, जिससे बाजार को और समर्थन मिल रहा है।
वर्तमान में मोटे माल के भाव ₹9,150 प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच चुके हैं, जबकि छोटे माल के भाव ₹8,400 के स्तर को पार कर चुके हैं। बाजार जानकारों का मानना है कि मौजूदा आपूर्ति संकट और मजबूत मांग के बीच उड़द के भाव जल्द ही ₹10,000 प्रति क्विंटल के स्तर को छू सकते हैं।