उत्तर भारत में मानसून से पहले हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी फसलों, खासकर गेहूं पर गहरा असर डाला है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल को 10% से 20% तक नुकसान होने का अनुमान है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह नुकसान 25–30% तक पहुंच चुका है। कई जिलों में तो 40% तक फसल गिरने (लॉजिंग) की खबरें हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हुई हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मार्च में 33.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से काफी अधिक है, और इसका असर अप्रैल के शुरुआती दिनों तक बना रहा। चूंकि गेहूं की कटाई इसी समय होती है, इसलिए लगातार खराब मौसम से दानों की चमक फीकी पड़ गई है, दाने सिकुड़ गए हैं और उनकी गुणवत्ता में गिरावट आई है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर देखने को मिल रहा है—खराब गेहूं को लगभग 2% छूट पर बेचा जा रहा है, जबकि अच्छी क्वालिटी का गेहूं सामान्य से 1% महंगा बिक रहा है।
व्यापारिक नजरिए से देखें तो बाजार में क्वालिटी का बड़ा अंतर बनता दिख रहा है। खराब मौसम के चलते लो-क्वालिटी गेहूं की आवक बढ़ेगी, जबकि सुपर क्वालिटी गेहूं की मांग मजबूत बनी रहेगी। यही कारण है कि बड़ी कंपनियां जैसे ITC, ब्रिटानिया, OLAM और कारगिल लगातार खरीदारी कर रही हैं। वहीं मिलर्स के पास पुराना स्टॉक सीमित है और नई फसल की आवक में करीब 10 दिन की देरी हो गई है, जिससे उन्हें ऊंचे दामों पर खरीद करनी पड़ रही है।
कोटा और अन्य मंडियों से मिल रही जानकारी के अनुसार, दक्षिण भारत की मांग (साउथ लाइन) भी मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते मध्य प्रदेश और राजस्थान से रेक लोडिंग तेजी से हो रही है। हाल ही में व्यापारियों ने भाव में ₹30 तक की बढ़ोतरी की मांग भी की है।
कुल मिलाकर, देश के गेहूं उत्पादन में 3–4% की गिरावट आ सकती है और इस बार उत्पादन करीब 11.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है। हालांकि चना और मक्का जैसी अन्य रबी फसलों पर इस मौसम का ज्यादा असर नहीं पड़ा है।
बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले कुछ दिनों में गेहूं की कीमतों में ₹50 से ₹75 तक की तेजी देखने को मिल सकती है।