सरसों बाजार में कल जोरदार तेजी देखने को मिली, जहां आवक में अचानक आई कमी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते वैश्विक तनाव ने भावों को तेजी से ऊपर धकेल दिया। कोटा के गोयल प्लांट पर सरसों का भाव एक ही दिन में 400 रुपये उछलकर 7300 रुपये तक पहुंच गया, जिसने व्यापारियों को भी चौंका दिया। बड़ी तेल मिलों की सक्रियता के चलते बाजार में व्यापक स्तर पर 150 से 200 रुपये तक की तेजी दर्ज की गई।
प्रमुख प्लांटों की बात करें तो अडानी के गोहाना, बूंदी और अलवर प्लांट्स में लगभग 200 रुपये की तेजी के साथ भाव 7250 रुपये तक पहुंच गया। आगरा के बीपी प्लांट पर 225 रुपये की तेजी के साथ 7625 रुपये और शारदा प्लांट पर 150 रुपये बढ़कर 7500 रुपये दर्ज किया गया। वहीं सलोनी ग्रुप के शमशाबाद, डिगनेर, अलवर, मुरैना और कोटा प्लांट्स पर सरसों का भाव 225 रुपये की तेजी के साथ 7925 रुपये तक पहुंच गया।
रामनवमी के चलते अधिकांश मंडियां बंद रहने से देशभर में कुल आवक घटकर लगभग 8 लाख बोरी रह गई, जबकि मार्च के मध्य में यही आवक 14–15 लाख बोरी तक पहुंच रही थी। यानी करीब 50% की गिरावट ने बाजार को मजबूत सपोर्ट दिया और तेजी को और बल मिला।
हालांकि, इतनी बड़ी तेजी के पीछे वास्तविक मांग (पक्के माल की ग्राहकी) का अभाव दिखाई दे रहा है, जिससे बाजार में सट्टेबाजी की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च एंडिंग के बावजूद इस तरह की तेजी असामान्य है और इसका मुख्य कारण वैश्विक घटनाक्रम हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे घरेलू बाजार में भी सरसों और अन्य खाद्य तेलों के भाव प्रभावित हो रहे हैं।
गौरतलब है कि इसी सप्ताह की शुरुआत में तनाव कम होने की खबर से बाजार 200–300 रुपये तक टूट गया था, जबकि अब फिर से तनाव बढ़ने की खबरों ने तेजी को जन्म दिया है। इससे स्पष्ट है कि फिलहाल बाजार पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर होकर चल रहा है।
मंडी भावों पर नजर डालें तो जयपुर में 150 रुपये की तेजी के साथ 7250, भरतपुर में 175 रुपये की तेजी के साथ 6850, सुमेरपुर में 100 रुपये बढ़कर 7100 और चरखी दादरी में लगभग 6900 रुपये का स्तर देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा वैश्विक हालात बने रहते हैं तो सरसों में 300–400 रुपये की और तेजी संभव है, लेकिन जैसे ही तनाव कम होगा, बाजार में उतनी ही तेजी से गिरावट भी आ सकती है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी इसी तरह की तेजी देखी गई थी, जिसने बाद में पूरे सीजन को प्रभावित किया था।
ऐसे में मौजूदा ऊंचे स्तरों पर नई खरीदारी जोखिम भरी मानी जा रही है। बाजार फिलहाल अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले दौर में है, इसलिए व्यापारियों और किसानों को सतर्क रहकर फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।