चना बाजार में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त तेजी का माहौल बना हुआ है। देश की प्रमुख मंडियों और व्यापारिक केंद्रों में चना के भाव लगातार मजबूत हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों और स्टॉकिस्टों की सक्रियता भी बढ़ गई है। 9 मई से 19 मई के बीच दिल्ली राजस्थान चना ₹5600 से बढ़कर ₹6000 प्रति क्विंटल पहुंच गया। कटनी देसी चना ₹5650 से उछलकर ₹6050, मुंबई ऑस्ट्रेलिया चना ₹5550 से बढ़कर ₹6050 और लातूर अनागिरी चना ₹5450 से सीधे ₹6150 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं मुंबई तंजानिया चना भी ₹5275 से बढ़कर ₹5750 प्रति क्विंटल बिकने लगा।
मार्च 2026 के औसत भावों की तुलना करें तो बाजार में तेजी और भी स्पष्ट दिखाई देती है। लातूर अनागिरी चना मार्च के औसत ₹5300 से बढ़कर ₹6150 तक पहुंच चुका है। दिल्ली राजस्थान चना ₹5650 से ₹6000 और मुंबई ऑस्ट्रेलिया चना ₹5475 से बढ़कर ₹6050 प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती देखने को मिल रही है, जहां ऑस्ट्रेलिया चना C&F कीमतें $545 से बढ़कर $600 प्रति टन तक पहुंच गई हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार तेजी के पीछे कई मजबूत कारण काम कर रहे हैं। इस सीजन में चना आयात में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान कुल चना आयात घटकर 8.14 लाख टन रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 12.44 लाख टन था। दूसरी ओर सरकारी खरीद लगातार जारी है, जिससे खुले बाजार में उपलब्धता सीमित हो गई है। गोदामों में स्टॉक पहले से भरा होने और लोकल चना की सप्लाई कमजोर रहने से भी बाजार को मजबूती मिल रही है।
पीली मटर के कमजोर आयात और घरेलू उत्पादन कम रहने की खबरों ने भी चना बाजार को अतिरिक्त समर्थन दिया है। व्यापारियों का मानना है कि जब तक सरकार खुले बाजार में स्टॉक बिक्री शुरू नहीं करती, तब तक चना में तेजी का माहौल बना रह सकता है।
फिलहाल बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह मजबूत दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में चना के भावों में और तेजी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।