किसान और व्यापारियों के अनुसार सरसों बाजार में इस समय लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। सप्ताह की शुरुआत में तेजी देखने को मिली, लेकिन बाद के दिनों में बाजार में हल्की नरमी दर्ज की गई। जयपुर मंडी में सरसों के भाव करीब ₹7375 प्रति क्विंटल तक पहुंचे, जबकि कई प्रमुख प्लांटों में ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल तक गिरावट देखने को मिली। गोयल कोटा प्लांट के भाव घटकर ₹7300 तक पहुंचे, वहीं कुछ प्लांटों में दिन के अंत तक हल्की रिकवरी भी दर्ज हुई।
सरसों तेल बाजार में मांग सामान्य रहने से दबाव बना हुआ है। जयपुर, बूंदी, कोटा और अन्य प्रमुख बाजारों में कच्ची घानी और एक्सपेलर तेल के भाव में गिरावट देखी गई। दूसरी ओर पशु आहार उद्योग की मजबूत मांग के चलते सरसों खल में अच्छी तेजी बनी हुई है। जयपुर, मुरैना, सुमेरपुर और चरखी दादरी जैसे बाजारों में खल के भाव ₹75 से ₹100 प्रति क्विंटल तक मजबूत हुए हैं।
व्यापारियों का मानना है कि बाजार पर इस समय दो विपरीत कारकों का असर दिखाई दे रहा है। एक तरफ खाद्य तेलों में दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरसों खल की मजबूत मांग बाजार को सहारा दे रही है। इसके अलावा इस वर्ष सरसों के भाव लगातार एमएसपी से ऊपर बने हुए हैं, जबकि सरकारी एजेंसियों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से बाजार में अतिरिक्त दबाव की संभावना कम दिखाई दे रही है।
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले केरल तट पर पहुंच सकता है। मानसून के आगमन के साथ खाद्य तेलों की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे जून महीने में सरसों तेल और सरसों बाजार को समर्थन मिल सकता है। वर्तमान में सरसों तेल, सोयाबीन और पाम तेल की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण उपभोक्ताओं की प्राथमिकता बना हुआ है।
बाजार जानकारों के अनुसार निकट अवधि में सरसों बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है, लेकिन जून महीने में मांग बढ़ने पर बाजार में फिर तेजी बनने की संभावना बनी हुई है।