सरकार अगले तीन वर्षों में गेहूं साइलो की क्षमता को वर्तमान 2.8 मिलियन टन से बढ़ाकर 9 मिलियन टन करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। ₹9,000 करोड़ की इस परियोजना के तहत 250 स्थानों पर साइलो बनाए जाएंगे। निर्माण के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया गया है, और प्रमुख निजी कंपनियों को अनुबंध दिए गए हैं। इन साइलो से भंडारण लागत में कमी, अनाज संरक्षण में सुधार और किसानों के लिए खरीद प्रक्रिया को सरल बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, धान भंडारण के लिए भी पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
सरकार ने अत्याधुनिक भंडारण सुविधाओं की क्षमता को बढ़ाते हुए 9 मिलियन टन (MT) गेहूं साइलो निर्माण का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में, 2.8 मिलियन टन की क्षमता वाले साइलो संचालित हो रहे हैं। भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत 2.5 मिलियन टन क्षमता वाले साइलो निर्माण के लिए निविदाएं जारी की हैं।
फरवरी 2025 तक इन साइलो के निर्माण के अनुबंध दिए जाएंगे। इसके अलावा, 80 स्थानों पर 3.5 मिलियन टन क्षमता वाले साइलो के निर्माण के अनुबंध निजी कंपनियों को दिए गए हैं, जो अगले दो वर्षों में तैयार होंगे। इस परियोजना के तहत 9 मिलियन टन की कुल क्षमता के साइलो 250 स्थानों पर बनाए जाएंगे।
इस योजना में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार समेत 12 राज्यों को शामिल किया गया है। निर्माण के लिए आदानी एग्री लॉजिस्टिक्स, KCC इंफ्रास्ट्रक्चर, नेशनल कोलैटरल मैनेजमेंट सर्विस, और ओम मेटल्स इंफ्रा जैसी कंपनियों को अनुबंध दिए गए हैं।
साइलो निर्माण के दो मॉडल अपनाए जा रहे हैं: DBFOT (डिज़ाइन, बिल्ड, फंड, ओन और ट्रांसफर) और DBFOO (डिज़ाइन, बिल्ड, फंड, ओन और ऑपरेट)। इन साइलो के निर्माण से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी और अनाज का संरक्षण बेहतर होगा।
धान भंडारण के लिए भी सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। बक्सर, बिहार में 12,500 टन क्षमता वाले स्टील साइलो बनाए गए हैं, जिन्हें अगले महीने से इस्तेमाल किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य भंडारण के दौरान अनाज के नुकसान को कम करना और गुणवत्ता बनाए रखना है।
सरकार की इस पहल से किसानों को फायदा होगा और खाद्यान्न आपूर्ति शृंखला में सुधार होगा।